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पिताश्य की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज: क्या खाएं और क्या ना खाएं

पिताश्य की पथरी के लक्षण (Symptoms of Kidney Stones) कई प्रकार के हो सकते हैं और ये आपके पथरी के आकार, स्थान और संबंधित तंतुस्त्रियों के जाने के साथ हो सकते हैं। पिताश्य पथरी एक अच्छे तरीके से डायग्नोज की जा सकती है और सही इलाज की जरूरत है।

1.पीठ या पेट के निचले हिस्से में दर्द (Lower Back or Abdominal Pain): पिताश्य पथरी का सबसे सामान्य लक्षण एक तेज दर्द होता है, जो पीठ के निचले हिस्से या पेट के एक ओर होता है। यह दर्द अचानक शुरू होता है और कभी-कभी बहुत तेज होता है, जो आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है।

2. पेशाब करते समय दर्द (Pain During Urination): पिताश्य पथरी के बाद, पेशाब करते समय भी दर्द हो सकता है। इस दर्द की अत्यधिकता और स्थान डिपेंड कर सकता है।

3. बहुत तेज या अकसर पेशाब करना (Frequent and Urgent Urination): पिताश्य पथरी के कारण, पेशाब करने की आवश्यकता अकसर होती है और यह बहुत तेज हो सकता है।

4. आपका पेशाब सुना होने का अहसास (Feeling the Need to Urinate Even When the Bladder is Empty): यह लक्षण अकसर होता है और पिताश्य पथरी के कारण हो सकता है।

5. पेशाब के साथ खून (Blood in Urine): पिताश्य पथरी के साथ, पेशाब में खून के मिश्रण का एक और सामान्य लक्षण हो सकता है। यदि आपका पेशाब गहरा लाल या गहरा हरा हो रहा है, तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

6. पेशाब में आग और जलन (Burning Sensation During Urination): पिताश्य पथरी के लिए यह एक और आम लक्षण हो सकता है।

7. पेट की ओर की ओर या जांघ की ओर की ओर दर्द (Groin or Inner Thigh Pain): पिताश्य पथरी के कुछ प्रकार के पथरी आपके पेट के बजाय पेट की ओर की ओर या जांघ की ओर की ओर दर्द का कारण बन सकते हैं।

1.पिताश्य की पथरी के कारण

पिताश्य की पथरी
पिताश्य की पथरी

पिताश्य की पथरी (Kidney Stones) के कारण कई तरह के हो सकते हैं, और ये आमतौर पर पेशाब के अंग के आंतरिक हिस्से में पथरियों के रूप में बनने वाले तत्वों की अत्यधिक संघटन से होते हैं। निम्नलिखित कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • अधिक कैल्शियम: अधिक कैल्शियम की खाप किए जाने, जैसे कि अधिक दुग्ध उपभोग, कैल्शियम पूर्ण खाद्य पदार्थों का सेवन, और कैल्शियम सप्लीमेंट्स का अत्यधिक प्रयोग, किडनी स्टोन के बढ़ते हुए जोखिम को बढ़ा सकता है।
  • अधिक ओक्सलेट: अधिक मात्रा में ओक्सलेट कैल्शियम के साथ मिलकर पथरी के रूप में जम सकता है। कुछ आहार में ओक्सलेट, जैसे कि पालक, चुकंदर, टमाटर, चॉकलेट, और बैरीज, पाए जाते हैं।
  • कम पानी पीना: पानी की कमी किडनी के पाथरी बनने के खतरे को बढ़ा सकती है, क्योंकि पानी तत्वों को प्राकृतिक रूप से उरिन से बाहर निकालने में मदद करता है।
  • जीवाणु संक्रमण: किडनी के संक्रमण या मूत्रमार्ग में संक्रमण किडनी पथरी के कारण बन सकते हैं।
  • जीवाणु संक्रमण: किडनी के संक्रमण या मूत्रमार्ग में संक्रमण किडनी पथरी के कारण बन सकते हैं।
  • गुर्दे के परिस्थितियों की गड़बड़ी: कुछ गुर्दे की बिमारियाँ, जैसे कि पॉलिसिस्टिक किडनी रोग, किडनी स्टोन के जन्म को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
  • परिवारिक इतिहास: यदि आपके परिवार में किडनी स्टोन की प्रेवश की कोई रिपोर्ट है, तो आपकी ख़ुद की किडनी स्टोन के बनने के ख़तरे को बढ़ा सकता है।
  • अधिक प्रोटीन और सॉडियम: अधिक मात्रा में प्रोटीन और सॉडियम की खाप किडनी के पाथरी के जन्म को प्रोत्साहित कर सकती

2.पिताश्य की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज

पिताश्य की पथरी
yoga

पिताश्य की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज विभिन्न प्रकार के पथरियों के आधार पर किया जा सकता है, और इसके लिए एक प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना सबसे अच्छा है। यहां कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक उपाय और दवाएँ हैं जो पिताश्य की पथरी के इलाज में प्रयोग किए जा सकते हैं:

  • अश्मरिहर चूर्ण (Ashmarihar Churna): यह आयुर्वेदिक चूर्ण पथरियों को पिघलाने और निकालने में मदद कर सकता है। इसे गर्म पानी के साथ दिन में दो बार लेना चाहिए।
  • पुनर्नवा (Punarnava): पुनर्नवा एक प्राकृतिक उपाय है जो किडनी स्टोन के इलाज में मदद कर सकता है। इसे कैप्सूल या चूर्ण की रूप में लिया जा सकता है।
  • गोखरू (Gokhru): गोखरू के बीज का उपयोग पथरी के इलाज में किया जा सकता है। यह किडनी स्टोन को तोड़ने और बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
  • त्रिकटु (Trikatu): त्रिकटु एक मिश्रित दवा है जिसमें पिप्पली, अदरक, और मरी एक्सट्रैक्ट होते हैं। इसका सेवन पाथरी के इलाज में लाभकारी हो सकता है।
  • प्राणायाम और योग: प्राणायाम और योग का अभ्यास करना किडनी के स्वस्थ फ़ंक्शन को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है और पथरी के जोखिम को कम कर सकता है।
  • साफ़ पानी की प्राप्ति: अच्छी प्राकृतिक पानी की प्राप्ति बहुत महत्वपूर्ण है। यह किडनी स्टोन के बनने के ख़तरे को कम कर सकता है।

3.पिताश्य की पथरी के घरेलू उपाय

पिताश्य की पथरी

पिताश्य की पथरी के घरेलू उपाय आपको आराम पहुंचाने और पथरी को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं, लेकिन यह बेहद महत्वपूर्ण है कि आप पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें, क्योंकि यह आपके पथरी के प्रकार और आपके स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। यहां कुछ घरेलू उपाय हैं जो पिताश्य की पथरी के इलाज में मदद कर सकते हैं:

  1. पानी पीना: पिताश्य पथरी के उपचार में सबसे महत्वपूर्ण है कि आप पर्यापन पानी पिएं। यह पथरी के रूप में तत्वों को घुलाने और उरीन से बाहर निकालने में मदद करता है।
  2. लेमन जूस: लेमन जूस में विटामिन सी होता है जो पथरी को तोड़ने में मदद कर सकता है। रोजाना गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से फायदा हो सकता है।
  3. आलू बुखारे की चाय (Nettle Leaf Tea): आलू बुखारे की पत्तियों की चाय पथरी के इलाज में फायदेमंद हो सकती है।
  4. सफेद मूसली (Safed Musli): सफेद मूसली को शक्तिवर्धक के रूप में जाना जाता है और पथरी को तोड़ने में मदद कर सकता है।
  5. बसील तील (Basil Seeds): बसील तील को पानी में भिगोकर खाने से पथरी के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
  6. हारडा (Harad): हारड़ा को पानी में भिगोकर रात भर के लिए रखकर सुबह खाने से पथरी के लक्षणों में आराम हो सकता है।

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